Song 13 रोज करते हैं गुनाह, रोज हद से गुजरते हैं...
रोज करते हैं गुनाह
रोज हद से गुजरते हैं,
रहते हैं हर वक्त जुदा हमसे
और कहते हैँ इश्क करते हैँ………१
रोज करते हैं शिकायतें
रोज करते हैं शिकायतें
रोज जख्म दिया करते हैं
देते हैं ताज-ऐ-बेवफा हमको
और कहते हैँ इश्क करते हैँ………..२
रोज होते हैँ खफ़ा
रोज होते हैँ खफ़ा
रोज हम उनको मनाया करते हैँ
पल भर को यकीन नहीँ करते मुझपे
और कहते हैँ इश्क करते हैँ………..३
रोज छोड़ते हैँ साथ मेरा
रोज छोड़ते हैँ साथ मेरा
रोज वादा-ऐ-वफ़ा तोड़ते हैं
देते हैं आंसू मेरी मोहब्बत को
और कहते हैं इश्क करते हैँ……….४
रोज तोड़ते हैं दिल मेरा
रोज तोड़ते हैं दिल मेरा
रोज मुझको तबाह करते हैं
एक पल सुकून का देते नहीँ
और कहते हैं इश्क करते हैँ………..५
रोज करते हैँ करार कितने ही
रोज करते हैँ करार कितने ही
रोज खुद ही तोड़ देते हैं
एक वस्ल भी गंवारा नहीँ
और कहते हैं इश्क करते हैँ……..६
रोज मिलते हैं खूब ग़ैरों से
रोज मिलते हैं खूब ग़ैरों से
रोज हमपे सितम ये करते हैं
पल भर को मयस्सर नहीँ होती चाहत
और कहते हैं इश्क करते हैँ……..७
रोज छेड़ते हैं मेरे ख्यालों को
रोज छेड़ते हैं मेरे ख्यालों को
रोज सजदे में मेरे होते हैं
एक कलमे में भी मेरी फ़िकर नहीँ
और कहते हैँ इश्क करते हैँ………८
रोज पूछते हैं कितनी मोहब्बत है
रोज पूछते हैं कितनी मोहब्बत है
रोज मानने से इनकार करते हैं
रहते बेसुध हैं औरो की ख्वाहिश में
और कहते हैं इश्क करते हैँ…………..९
रोज मिटता है हौंसला मेरा
रोज मिटता है हौंसला मेरा
रोज हम गर्त से गुजरते हैँ
वो रहते हैं गैर की बाहों में
और कहते हैँ इश्क करते हैँ……….१०
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