Posts

Showing posts from June, 2020

Blog चाहो तो चन्द साँसों की रिश्वतें ले लो...

चाहो तो चन्द साँसों की रिश्वतें ले लो, एक वस्ल को मग़र तुम इनकार मत करो.....१ बेमौत मर जायेंगे हम तेरे तसव्वुर में, यूँ इस कदर हमको अपना तलबगार मत करो......२ हो न सकेगी मेरी मौजूदगी फिर बज़्म में तेरी, यूँ मेरे सामने किसी और को अपना हमराह मत करो....३ और आता ही क्या है  मोहब्बत के सिवाय, यूँ शरेआम बेवफ़ा कह कर मुझको गुनहगार मत करो...४ बोझ सह न पायेंगे हम तेरी इनायत का, पहले से ही फ़क़ीर हूँ और लाचार मत करो........५ ज़िन्दगी गुज़र जाये मेरी फाके में बेशक़, बेईमान कह कर यूँ मेरा तिरस्कार मत करो.......६ लफ़्ज़ दर लफ़्ज़ लिखेंगे हम तुमको, किसी गैर की ग़ज़ल बनने का इंतज़ार मत करो......७ एक रोज़ ज़रा क़रीने से हम तेरे जूड़े को गूंथेंगे, यूँ ज़ुल्फ़ लहराकर मेरी नींदे हराम मत करो........८ यूँ तो साथ देने को गैर भी अमादा हैँ तेरा, बेवज़ह, मेरे रक़ीबों को इतना आराम मत करो......९ तेरी हर नज़र का कायल हुआ बैठा है जमाना, सरका के रुख़ से परदा ख़ुद को शरे-आम मत करो....१०

Blog ये दौलत-ओ-शोहरत भला किस काम की मेरे..

ये दौलत-ओ-शोहरत भला किस काम की मेरे, कुछ देना ही है तो उनके सुर्ख़ लबों की मेरे होंठो पे एक निशानी दे दो.......१ ये ताज-ओ-हरम की भला क्या मुझको जरूरत, कुछ देना ही है तो बिखरी ज़ुल्फ़ों के साये में लिपटी एक शाम दे दो......२ ये दीन-ओ-ईमान की अहमियत भला मैं क्या जानूँ, कुछ देना ही है तो उनके गोरे हाँथो पे रची मेहँदी में मेरा नाम दे दो........३ ये इत्र-ओ-शबाब का हुनर भला मैं क्या जानूँ, कुछ देना ही है तो उनके मखमली ज़िस्म की खुशबू में तर हमाम दे दो......४ ये आराइश-ओ-रानाइयों का भला मैं लिहाज़ क्यों करूँ, कुछ देना ही है तो उनके बाहोँ की नक्काशी में मुझे आराम दे दो........५ ये रौब-ओ-रुआब की क़ीमत भला मैं क्या जानूँ, कुछ देना ही है तो हर रोज उनसे मुलाकात का मुझको एहतराम दे दो......६ ये शोख़ी-ओ-शबनम से भला क्या वास्ता मेरा, कुछ देना ही है तो उनकी हसरत में मेरी चाहत का एक अरमान दे दो......७ ये इल्म-ओ-हुनर से भला क्या इत्तिफ़ाक मेरा, कुछ देना ही है तो उनकी चेहरे पे मुझे सोचकर एक इब्तिसाम दे दो.......८ ये गुल-ओ-बहार की भला क्या आरजू मुझको, कुछ देना ही है तो उनकी साँसों...

Blog वक्त के साथ शायद तुम भी बदल गयी होगी...

अब पहले जैसी बात कहाँ रही होगी वक़्त के साथ शायद तुम भी बदल गयी होगी, बदल गये होँगे उन पैमानों के मायने तेरे और लबों की सुर्खी भी हल्की सी ढल गयी होगी.........१ ज़ुल्फ़ें रुख़सार पे आकर उतना ही तँग करती हैँ क्या तेरे गालों से होकर लबों को छूने की शरारतें करती हैँ क्या, अब तो शायद गेसुओं की फितरत बदल गयी होगी वक्त के साथ शायद तुम भी बदल गयी होगी................२ हवायें खिड़कियों के रास्ते तेरे करीब आती हैँ क्या बदन पे तेरे मखमली फ़ाहों को सहलाती हैँ क्या, अब तो शायद हवाओं को मंज़िल मिल गयी होगी वक्त के साथ शायद तुम भी बदल गयी होगी...................३ गुलाब अब भी तुझसे उतना ही बैर रखते हैँ देखकर गालों की लाली तुझसे अब भी जलते हैँ, या फिर तेरे जिस्म की रँगत भी तुझ सी ही बदल गयी होगी वक़्त के साथ शायद तुम भी बदल गयी होगी...................४ क्या हाल है तेरी पीठ के उस काले तिल का तिल पे ठहरे मेरे हज़ार चुम्बनों के असर का, अब तो शायद साँसों की खुशबू भी बदल गयी होगी वक़्त के साथ शायद तुम भी बदल गयी होगी..................५ क्या अब भी तेरी आँखों पे लोग मरते हैँ रात भर जाग-जाग ...

Song बिखरे हैँ शबनम के जैसे...

बिखरे हैँ शबनम के जैसे तेरे लबों से निकले हुये ये साज, दिल चाहे चुन लूँ सारे घुँघरू से बजते हुये तेरे अल्फ़ाज, कानों में घुलती जाये चाहत सी बढ़ती जाये दे जाये सुकूँ के एहसास, तेरी आवाज़ तेरे अल्फ़ाज..........ooo मेरे मेहताब मौसम भी बदल रहा है अपने मिज़ाज तेरा आगाज़..... मेरे मेहताब, साँसों ने भी बदल लिया अपना अन्दाज....... मेरे मेहताब घना कोहरा जैसे कहीँ पे छा रहा, तेरे सिवाय कुछ भी नजर नहीँ आ रहा, बेक़रारी बेसबब बढ़ रही, तुझे छूने को दिल मचल रहा, बन्दिशें सारी हटा दो मुझपे से आज, मेरे मेहताब ऐसा लगता है जैसे फ़िजा में घुल रहे, तेरे अल्फ़ाज....... मेरे मेहताब तू नहीँ है यहाँ तो क्या हुआ, तेरे लिये ही तो है मेरी हर दुआ, चाहत मेरी बन कर जुगनू चमके गगन में जैसे बना रहे हों तुझ सा नक़ाब, मेरे मेहताब रातों को नींदे भी लेकर आती हैँ बस तेरे ही ख्वाब.......मेरे मेहताब साँसों की गर्मी से जैसे जिस्म मेरा पिघल रहा, सब कुछ है पहले जैसा फिर क्योँ मन मेरा मचल रहा, ऐसा लगता है जैसे तू मुझमें है मिल रहा, गुलो के रँग, बढ़ती उमंग बेदम साँसे, जैसे लड़ी हो कोई जंग, सब ही ...

Song जाने क्या कह जाती हैं ये बारिश की बूंदें..

जाने क्या कह जाती हैं ये बारिश की बूंदें, तेरी याद दे जाती हैं ये बारिश की बूंदे, मन भीग तो रहा है तन भीग तो रहा है जाने कैसी प्यास ये बढ़ाती हैँ बारिश की बूंदें………….१ हौले-हौले से मेरे कानों को छू लें, चुपके-चुपके से मेरे लबों पे फिसलें, थोड़ा-थोड़ा सा मेरा बदन भिगोकर जाने कैसी प्यास ये बढ़ाती हैं बारिश की बूंदें………२ अभी-अभी तो मैं जगा था तेरी यादों की राह मैं चला था, चुपके से मेरे चेहरे को छूकर पालकों से लिपट जाती हैँ जाने कैसी प्यास ये बढ़ाती हैं बारिश की बूंदें………..३ रब का मैं शुक्र मनाऊँ तेरी यादों से मैं लिपट जाऊँ, चाहे मैं कहीँ भी जाऊँ रिम-झिम की आवाज मेरे कानों में आती है, जाने कैसी प्यास ये बढाती हैं बारिश की बूंदें………..४ अभी कल ही तो बरसे थे बदल, ज़मीन को फिर से किया था घायल, न जाने फिर कहाँ से बादलोँ सँग चली आती हैं, जाने कैसी प्यास ये बढ़ाती हैं बारिश की बूंदें…………५

Song इतना आसान भी नहीँ..

इतना आसान भी नहीँ जाम होंठों से लगा लेना, सुकून गिरवीं रखना पड़ता है किसी की याद में पीने के लिये........१ इतना आसान भी नहीँ है किसी की चाह में खुद को मिटा देना, नींदे तबाह करनी पड़ती हैँ किसी के इश्क़ में फ़ना होने के लिये......२ इतना आसान भी नहीँ है यार का हमराह हो जाना, ख़ुद को खो देने पड़ता है किसी की रूह में उतरने के लिये........३ इतना आसान भी नहीँ है किसी का राज़ दार होना, ख़ुद को भूलना पड़ता है किसी को याद आने के लिये.........४ इतना आसान भी नहीँ है किसी के हिज्र का निशाँ होना, खुद भी डूबना पड़ता है किसी की तनहाइयों का सबब होने के लिये........५ इतना आसान भी नहीँ है किसी के इश्क़ का गुमान होना, खुद की ख़्वाहिशें मिटती हैँ किसी की हसरतें बनने के लिये.........६ इतना आसान भी नहीँ है किसी के चेहरे का आब होना, रंज भूलने पड़ते हैँ किसी की नजरों का गुलाब होने के लिये........७ इतना आसान भी नहीँ है किसी के हुस्न का मुराद होना, ख़ुद को ख़ाक होना पड़ता है किसी के ख़्वाब जीने के लिये..........८ इतना आसान भी नहीँ है किसी की आदतों में शामिल होना, ख़ु...

Song इश्क़ ना सही रंजिश ही निभाने आ जा..

इश्क़ ना सही रंजिश ही निभाने आ जा, आ जा एक बार, फिर से मुझको आजमाने आ जा……..१ मैने माना कि मोहब्बत में मैंने भी खतायें की हैँ, इन्सान हूँ मैं, इन्सान समझकर मेरा साथ तू निभाने आ जा…….२ मैं हर शर्त पे तेरे साथ को अमादा हूँ, तू भी एक बार सबको भुलाकर मेरी बाहोँ में समाने आ जा……..३ अब कोई छोर कोई कश्ती नहीँ दिखती मुझको, हो सके तो एक बार मुझको मझधार में बचाने आ जा……..४ तेरे बगैर रह लिया एक जमाना मैने, अब होता नहीँ गुजारा आ जा एक बार मुझे अपने सीने से लगाने आ जा……..५ कब तलक रूठे रहोगे मुझसे मेरे होकर भी, आ तलबगार मुझपे एक बार अपना हक जताने आ जा……..६ रोज साँसों को दुहाई देता हूँ रोज धड़कन को दुहाई देता हूँ, अब नहीँ सुनता मेरी बात कोई आजा एक बार मेरी जिन्दगी बचाने आ जा………७ हाँ, किये होँगे कयी सितम मैने रोज खुद ही मैं तड़पता हूँ आ जा एक बार सनम मुझको जुल्मों की सजायें देने आ जा…….८

Song 13 ख़िलाफ़ हो गये हैँ बागबाँ के फूल सारे..

ख़िलाफ़ हो गये हैँ बागबाँ के फूल सारे जबसे समझने लगे हैँ वो आँखों के इशारे……..१ रंज रखने लगे हैँ जुगनू ये सारे के सारे, तुझसे हो रहे हैं ख़्वाब रौशन जबसे हमारे………….२ जल रहे हैँ आसमाँ के तारे ये सारे, जबसे बढ़ने लगे हैँ नजदीक वो हमारे………..३ कुफ़्र करते हैं ये मौसम बेचारे, हो रहे हैँ हमदम वो जबसे हमारे……………..४ चिढ़ रहे हैँ लोग इस शहर के ये सारे, चलने लगे हैँ जबसे लेकर हाँथों में हाँथ वो हमारे…….५ सकूँ खो रहे हैँ आशियाँ के चराग़ सारे, जबसे कर रहे हैँ रौशन उनसे वास्ते हमारे………६ मिट रहे हैँ सागर के तिलस्म सारे, हो रहे हैँ फ़ना जबसे वो इश्क़ में हमारे……….७ खुलते ही जा रहे हैँ इस जहाँ के राज सारे, जबसे हो रहे हैँ राजदार वो हमारे………….८ खत्म हो रहे हैँ मयख़ाने के हादसात सारे, बन रहे हैं जाम जबसे उनके लब हमारे………९ ख़ाक हो रहे हैँ दुनिया के सारे नज़ारे, रहने लगे हैँ जबसे वो आग़ोश में हमारे……..१०

Song 13 आज मैंने भी हारकर सारे खत जला डाले..

आज मैंने भी हारकर सारे खत जला डाले, इश्क को रोशनी देते दिल मे जलते सारे चिराग बुझा डाले………..१ लौटकर देखा नहीँ मैंने श्मशान से लौटते हुये, रखे थे सँजोकर जो ख़्वाब दिल में वो पल भर में मिटा डाले……..२ अब नहीँ होगा मेरी फितरत पे दाग कोई, जो करते थे गुनाह वो एहसास सब भुला डाले………३ पूछता नहीँ था कोई अब तलक हाल मेरा, आज बैठे-बैठे ही वो असबाब सब मिटा डाले…….४ रास्ता मिलता नहीँ था मुझको मुझ तक पहुंचने का, खुद ही से खुद की लड़ाई में आज वो हालात सब बदल डाले…………५ हो रहा था खफ़ा ये जहान सारा मुझसे, ऊब कर तन्हाइयों से वो तन्हा ख्याल सब मिटा डाले……….६ रोज उठती थी टीस दिल मे कहीँ, हद हो गयी जब सहन करने की वो दर्द-ओ-साद सब भुला डाले………..७ मर गयी थी आब-ओ-शर्म जिन आंखों की, बेजार जानकर खुद को वो करार खत्म कर डाले………८

Song 13 रोज करते हैं गुनाह, रोज हद से गुजरते हैं...

रोज करते हैं गुनाह रोज हद से गुजरते हैं, रहते हैं हर वक्त जुदा हमसे और कहते हैँ इश्क करते हैँ………१ रोज करते हैं शिकायतें रोज जख्म दिया करते हैं देते हैं ताज-ऐ-बेवफा हमको और कहते हैँ इश्क करते हैँ………..२ रोज होते हैँ खफ़ा रोज हम उनको मनाया करते हैँ पल भर को यकीन नहीँ करते मुझपे और कहते हैँ इश्क करते हैँ………..३ रोज छोड़ते हैँ साथ मेरा रोज वादा-ऐ-वफ़ा तोड़ते हैं देते हैं आंसू मेरी मोहब्बत को और कहते हैं इश्क करते हैँ……….४ रोज तोड़ते हैं दिल मेरा रोज मुझको तबाह करते हैं एक पल सुकून का देते नहीँ और कहते हैं इश्क करते हैँ………..५ रोज करते हैँ करार कितने ही रोज खुद ही तोड़ देते हैं एक वस्ल भी गंवारा नहीँ और कहते हैं इश्क करते हैँ……..६ रोज मिलते हैं खूब ग़ैरों से रोज हमपे सितम ये करते हैं पल भर को मयस्सर नहीँ होती चाहत और कहते हैं इश्क करते हैँ……..७ रोज छेड़ते हैं मेरे ख्यालों को रोज सजदे में मेरे होते हैं एक कलमे में भी मेरी फ़िकर नहीँ और कहते हैँ इश्क करते हैँ………८ रोज पूछते हैं कितनी मोहब्बत है रोज मानने से इनकार करते हैं रहते बेसुध हैं औरो की ...

Song 12 ख़्वाहिशें हैं बादल की तुझपे बरस जाने की..

ख़्वाहिशें हैं बादल की तुझपे बरस जाने की, बूंदों के बहाने ही तुझसे लिपट जाने की……..१ चन्दा भी ये जलता है तेरे हुस्न से सनम, कोशिशें ये करता है तुझको देख पाने की……..२ डर मुझको लगता है इन दुनिया वालोँ से, साजिशें ये करते हैँ तुझको, मुझसे चुराने की……..३ कैसे मैं ये सोचूँ भी तेरे बिना जियूँगा, जन्मों की चाहत थी तुझे अपना बनाने की……..४ लाख जतन किये कितनी ठोकर मैने खायी है, तब तू मिला है मुझको जैसे रात हो पूनम की………५ दिल का सुकून है तू साँसों का करार है, बोलो कैसे सोचूँ भी मैं तुझे भूल जाने की………..६ रातोँ की ख़ामोशी है तू दिन का उजाला है, सोचो क्योँ न करूँ मैं इबादतें साथ निभाने की……..७ दर्द में आराम है तू जन्मों का प्यार है, फिर कैसे सुन लूँ मैं बातेँ जमाने की………८ इश्क़ किया है मैने साथ निभाऊंगा, ऐसे कैसे जाने दूँ मैं तू हक़ीक़त है मेरे हर ख़्वाब की……९ नूर तेरा फबता है रौब तेरा चलता है, बातेँ दुनिया करती है हद से गुजरने की………..१०

Song 11 तेरी गीली-गीली जुल्फें..

तेरी गीली-गीली जुल्फें जुल्फों से टपकता पानी कह रही हो जैसे मेरी प्यास की कहानी……….1 कभी शाम को मिलो तुम मैं तुझमें सिमट जाऊँ तुम मुझसे लिपट जाओ कोई बन्दिशें न लगाना करने दो मुझे मनमानी………..2 मेरे चेहरे पे तुम बिछा दो भीगी जुल्फों की ये रवानी मुझे भीग जाने दो बेशक कर दो मुझपे इतनी मेहरबानी…….3 सर्द रातों को ख्वाबों में आखिर मिलेँगे कबतक एक रोज आ भी जाओ होकर मेरे इश्क की दीवानी………4 न मुझको तुम सताओ अब और न रुलाओ मैं कितना तड़प रहा हूँ देखकर सँग-ए-मरमर सी तेरी जवानी…….5

Song 9 जो बेवफा है, वही तड़पे..

जो बेवफा है, वही तड़पे अगर इश्क में तो अच्छा होगा हमने हर डगर पर की है वफ़ा फिर भी न जाने क्यों तू मुझको दगा दे रहा है ये तो बता आखिर क्यों भला तू मुझको सजा दे रहा है………..१ मालूम तुझको भी है मोहब्बत के कानून सारे, एक तेरी खातिर मैने हारे हैं अपने अरमान सारे, फिर भी न जाने क्यों तू मुझसे खफ़ा हो रहा है ये तो बता आखिर क्यों भला तू मुझको सजा दे रहा है…….२ कसमे निभायी मैने सारे वादे निभाये, सारी रश्में निभायी मैने अपने सारे इरादे भुलाये, फिर भी न जाने क्यों तू मुझपे बेरहम हो रहा है ये तो बता आखिर क्यों भला तू मुझको सजा दे रहा है………३ तेरी खुशी में खोया रातों को मैं न सोया, तेरी हँसी की खातिर छुप-छुप कर मैं हूँ रोया, फिर भी न जाने क्यों तू मुझसे बेफिकर हो रहा है, ये तो बता आखिर क्यों भला तू मुझको सजा दे रहा है…….४ सबको है छोड़ा मैने एक तुझको पाने को, खुद को है भूला मैने तुझे याद रखने को, फिर भी न जाने क्यों तू मुझसे जुदा हो रहा है, ये तो बता आखिर क्यों भला तू मुझको सजा दे रहा है……..५ कितनी रातें बितायी मैने जाग कर तेरी ...

Song 9 तेरी आँखों ने भी मुझको पिलायी होगी..

तेरी आँखों ने भी मुझको पिलायी होगी, आखिर यूँ ही तो नहीँ मैं शराबी हुआ हूँ……१ तुमने कोई जुल्फ खुली छोड़ दी होगी, आखिर यूँ ही तो नहीँ मैं बहका हुआ हूँ……२ कभी तेरे लबों की शोखियाँ नजर आयी होंगी, आखिर यूँ ही तो नहीँ मैं दीवाना हुआ हूँ……३ कोई बात तो तूने मुझसे छुपाई होगी, आखिर यूँ ही तो नहीँ मैं पागल हुआ हूँ…….४ किसी गैर का ख़्याल तू अपने जेहन में लायी होगी, आखिर यूँ ही तो नहीँ मैं गुम-शुम हुआ हूँ……५ कभी बे-पर्दा हो तू मेरे सामने आयी होगी, आखिर यूँ ही तो नहीँ मैं बेदम हुआ हूँ………६

Song 8 मुद्दत हुयी लुटेरे, चाँद नहीँ देखा मैने..

मुद्दत हुयी लुटेरे, चाँद नहीँ देखा मैने, रुख से हटा दो परदा मिल जाये सुकून शायद…….१ रो – रो के सूखता है, अक्सर हलक ये मेरा, दो घूँट पिला दो कोई मिल जाये सुकून शायद……..२ मुद्दत हुयी लुटेरे, देखा नहीँ है तुझको, एक झलक दिखा दे अपनी मिल जाये सुकून शायद…..३ बुझ गये चराग सारे, कोई रास्ता नजर न आये, पहुँचा दे मुझको मयख़ाने मिल जाये सुकून शायद……४ कबसे तलब लगी है, साकी नहीँ है मिलता, एक रोज लबों से पिला दो मिल जाये सुकून शायद……५ किस-किस से पूछता फिरूँगा, मयख़ाना कहाँ-कहाँ हैं, एक जाम तुम बना दो मिल जाये सुकून शायद……….६

Song 7 हां, जिस्म तो दो ही थे मगर हम जान एक थे..

हां, जिस्म तो दो ही थे मगर हम जान एक थे एक ही चाह तेरी-मेरी, दिल के अरमान एक थे………1 सीने से लगाते थे जब मुझको, मुझे हमराह कहते थे, हां, सोचते थे जुदा-जुदा मगर ख्वाब एक थे…..2 शिकवे भी होते थे कभी शिकायतें भी करते थे, रूठे-रूठे से तुम रहते थे मगर आलाप एक थे……..3 बस हम ही थे जमीन तेरी, हम ही आसमान थे, कुछ भी हो खता हमसे मगर अन्जाम एक थे…….4 आईने में दिखते थे जैसे, वैसे ही मेरी आँखों में भी तो थे, तुम कितनी भी बदल जाओ मगर एहसास एक थे………5 क्या खूब अक्स था तेरा, अब्र तेरी अब्रुओं पे घिरते थे, कितना भी घुमड़कर बरसो तुम मगर वो आब एक थे……….6 क्या खूब तेरी आंखे थी,आंखे जैसे कि महताब थे, हर शाम मैं बहकता था सारे अस्बाब एक थे…..7 होता नहीँ मुनासिब अब, जो हालात पहले थे, होंठो से कभी, कभी हांथो से पिलाते थे मगर खुमार एक थे………8

Song 6 आ जाओ साजन, आ जाओ प्रीतम..

आ जाओ साजन आ जाओ प्रीतम कैसे जिये हम सदियों तेरे बिन इतना तो पता कर जाओ आओ फिर से मेरे हो जाओ………..१ जबसे गये हो मुड़कर न देखा न जाने कैसे किया अनदेखा मिल गया हो शायद कोई अपना वहाँ पर जिसकी चाहत में मुझको भुला बैठे हो चुप चुप से क्यों हो आखिर कुछ तो बताओ आओ फिर से मेरे हो जाओ……२ आती नहीँ क्या, याद हमारी करता था कितनी परवाह तुम्हारी आखिर ऐसा भी क्या है तेरे सजन में सारी उल्फत ही मिटा बैठे हो इतने खामोश क्यों हो जरा लब तो हिलाओ आओ फिर से मेरे हो जाओ………..३ वो खट्टी सी कैरी, मीठे से जामुन बेरों के काँटे गर्म हवाओं के चांटे ऐसा भी क्या है उस शहर के मकान में गाँव का भोला बचपन भुला बैठे हो चुप्पी ये क्यों है आखिर कुछ तो बताओ आओ फिर से मेरे हो जाओ………..४ पेड़ो के नीचे गलबहियाँ डाले शामों को मिला करते थे सावन की बारिश में नीम के नीचे चुम्बन किया करते थे ऐसा भी क्या है शहरों में जीवन सारा यौवन भुला बैठे हो ये लब क्यों सिले हैं आखिर कुछ तो बताओ आओ फिर से मेरे हो जाओ…………५

Song 5 जरूरी तो नहीँ

ज़रूरी तो नहीँ कि हर रात नीँद आ जाये, कुछ रातें खुली आँखे लिये सपनों की चादर तले रहती हैँ......१ जरूरी तो नहीँ कि हर सुबह ओस लब-ऐ-गुल को सहलाये, कुछ सुबहों की जरा सी धूप भी जी भर के मजा देती है.......२ जरूरी तो नहीँ कि सारा आसमाँ चाँदनी से ही निखर जाये, कुछ बदलियाँ सितारोँ की रोशनी से ख़ुद ही सँवर लेती हैँ......३ जरूरी तो नहीँ कि नर्म लहज़ा हर किसी को भा जाये, अपनापन लिये वो तल्खियाँ भी अज़ीज लगती हैँ..........४ जरूरी तो नहीँ कि हर रिश्ते में खिलखिलाहटें नजर आयें, कुछ रिश्ते उम्र भर झगड़ते हुये भी मुक़म्मल रहते हैँ.........५ जरूरी नहीँ कि सहूलियतें ज़िन्दगी बेहतर बना देती हैँ, किसी अपने के लिये दुश्वारियाँ भी जीने का मजा देती हैँ.....६ जरूरी नहीँ कि बेसबब हुस्न ही नजदीकियाँ बढ़ाये, इश्क़ सच्चा हो तो खामियाँ भी तलब इश्क़ की बढ़ा देती हैँ.....७ ज़रूरी नहीँ कि ज़िस्म की खूबियाँ ही यार को क़रीब लाये, इफ़्फ़त-ऐ-नज़र तो हिज़ाब में भी मोहब्बत क़माल करती है....८ ज़रूरी तो नहीँ कि वक्त के साथ हर इंसान बदल जाये, कुछ इन्सान उम्र भर न बदलकर भी खुशियाँ दे जाते हैँ........९

Song 4 अलविदा तुझको मोहब्बत तू मेरी जद में नहीं..

अलविदा तुझको मोहब्बत तू मेरी जद में नहीं, मैं राह का फ़क़ीर एक तू महलों की जागीर है.......1 पास कैसे आऊँ तेरे लग रहा है डर मुझे, मैं बुत हूँ पत्थर से बना तू काँच की तस्वीर है........2 तुझे एक दफा...

Song 3 जो इश्क में मेरा खुदा हुआ है..

जो इश्क में मेरा खुदा हुआ है, वो हर शख्स मुझसे खफ़ा हुआ है…….१ बेशक तू दूर गया है मुझसे, मगर जो वक्त बीता तेरे संग वो अब तक मुझसे जुड़ा हुआ है……..२ लाख कोशिशें की मुझपे सितम ढाने की, ...

Song 2. क़ुर्बतो के फ़साने में हम फ़ासलो का जमाना भूले हैँ...

क़ुर्बतो के फ़साने में हम फ़ासलो का जमाना भूले हैँ, तेरी सूरत अब भी याद है मुझको बेशक, हम अपना ही साया भूले हैँ… ……१ मुफ़लिसी के दौर में चराग अपने आशियाँ में जलाना भूले हैं, हर ...

Song 1. Mera maahi mainu vekhan de..

ਮੇਰਾ ਮਾਹੀਂ ਮੈਨੂੰ ਵੇਖਣ ਦੇ Mera maahi mainu vekhan de ਮੈਨੂੰ ਹੋਰ ਨਹੀਂ ਕੁਝ ਚਾਹ Mainu hor nahin kujh chaah ਵੇ ਸੁਣੀਆਂ ਗਲੀਆਂ ਦਿਲ ਦੀਆਂ ਨੇ Ve sunian galian dil dian ne ਮੈਂ ਤੱਕਦਾ ਓਹਦੀ ਰਾਹ Main takda ohdi raah ਕੱਢ ਜਿੰਦ ਮੇਰੇ ਤੋਂ ਵੇ ਰੱਬਾ Kadh jind mere ton ve rabba ਮੈਨੂੰ ਲੈਣੀ ਨਈ ਏ ਸਾਂਹ, Mainu lene nahi eh saah ਬਿਨ ...