Song 13 आज मैंने भी हारकर सारे खत जला डाले..

आज मैंने भी हारकर
सारे खत जला डाले,
इश्क को रोशनी देते
दिल मे जलते
सारे चिराग बुझा डाले………..१
लौटकर देखा नहीँ मैंने
श्मशान से लौटते हुये,
रखे थे सँजोकर
जो ख़्वाब दिल में
वो पल भर में मिटा डाले……..२
अब नहीँ होगा
मेरी फितरत पे दाग कोई,
जो करते थे गुनाह
वो एहसास
सब भुला डाले………३
पूछता नहीँ था कोई
अब तलक हाल मेरा,
आज बैठे-बैठे ही
वो असबाब सब मिटा डाले…….४
रास्ता मिलता नहीँ था
मुझको मुझ तक पहुंचने का,
खुद ही से खुद की लड़ाई में
आज वो हालात
सब बदल डाले…………५
हो रहा था खफ़ा
ये जहान सारा मुझसे,
ऊब कर तन्हाइयों से
वो तन्हा ख्याल
सब मिटा डाले……….६
रोज उठती थी
टीस दिल मे कहीँ,
हद हो गयी जब सहन करने की
वो दर्द-ओ-साद
सब भुला डाले………..७
मर गयी थी
आब-ओ-शर्म जिन आंखों की,
बेजार जानकर खुद को
वो करार
खत्म कर डाले………८

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