Song 13 ख़िलाफ़ हो गये हैँ बागबाँ के फूल सारे..

ख़िलाफ़ हो गये हैँ बागबाँ के फूल सारे
जबसे समझने लगे हैँ वो आँखों के इशारे……..१
रंज रखने लगे हैँ जुगनू ये सारे के सारे,
तुझसे हो रहे हैं ख़्वाब रौशन जबसे हमारे………….२
जल रहे हैँ आसमाँ के तारे ये सारे,
जबसे बढ़ने लगे हैँ नजदीक वो हमारे………..३
कुफ़्र करते हैं ये मौसम बेचारे,
हो रहे हैँ हमदम वो जबसे हमारे……………..४
चिढ़ रहे हैँ लोग इस शहर के ये सारे,
चलने लगे हैँ जबसे लेकर हाँथों में हाँथ वो हमारे…….५
सकूँ खो रहे हैँ आशियाँ के चराग़ सारे,
जबसे कर रहे हैँ रौशन उनसे वास्ते हमारे………६
मिट रहे हैँ सागर के तिलस्म सारे,
हो रहे हैँ फ़ना जबसे वो इश्क़ में हमारे……….७
खुलते ही जा रहे हैँ इस जहाँ के राज सारे,
जबसे हो रहे हैँ राजदार वो हमारे………….८
खत्म हो रहे हैँ मयख़ाने के हादसात सारे,
बन रहे हैं जाम जबसे उनके लब हमारे………९
ख़ाक हो रहे हैँ दुनिया के सारे नज़ारे,
रहने लगे हैँ जबसे वो आग़ोश में हमारे……..१०

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