Song 6 आ जाओ साजन, आ जाओ प्रीतम..

आ जाओ साजन
आ जाओ प्रीतम
कैसे जिये हम सदियों तेरे बिन
इतना तो पता कर जाओ
आओ फिर से मेरे हो जाओ………..१
जबसे गये हो मुड़कर न देखा
न जाने कैसे किया अनदेखा
मिल गया हो शायद कोई अपना वहाँ पर
जिसकी चाहत में मुझको भुला बैठे हो
चुप चुप से क्यों हो आखिर कुछ तो बताओ
आओ फिर से मेरे हो जाओ……२
आती नहीँ क्या, याद हमारी
करता था कितनी परवाह तुम्हारी
आखिर ऐसा भी क्या है तेरे सजन में
सारी उल्फत ही मिटा बैठे हो
इतने खामोश क्यों हो जरा लब तो हिलाओ
आओ फिर से मेरे हो जाओ………..३
वो खट्टी सी कैरी, मीठे से जामुन
बेरों के काँटे गर्म हवाओं के चांटे
ऐसा भी क्या है उस शहर के मकान में
गाँव का भोला बचपन भुला बैठे हो
चुप्पी ये क्यों है आखिर कुछ तो बताओ
आओ फिर से मेरे हो जाओ………..४
पेड़ो के नीचे गलबहियाँ डाले
शामों को मिला करते थे
सावन की बारिश में नीम के नीचे
चुम्बन किया करते थे
ऐसा भी क्या है शहरों में जीवन
सारा यौवन भुला बैठे हो
ये लब क्यों सिले हैं आखिर कुछ तो बताओ
आओ फिर से मेरे हो जाओ…………५

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