Song 7 हां, जिस्म तो दो ही थे मगर हम जान एक थे..
हां, जिस्म तो दो ही थे मगर हम जान एक थे
एक ही चाह तेरी-मेरी, दिल के अरमान एक थे………1
सीने से लगाते थे जब मुझको, मुझे हमराह कहते थे,
सीने से लगाते थे जब मुझको, मुझे हमराह कहते थे,
हां, सोचते थे जुदा-जुदा मगर ख्वाब एक थे…..2
शिकवे भी होते थे कभी शिकायतें भी करते थे,
शिकवे भी होते थे कभी शिकायतें भी करते थे,
रूठे-रूठे से तुम रहते थे मगर आलाप एक थे……..3
बस हम ही थे जमीन तेरी, हम ही आसमान थे,
बस हम ही थे जमीन तेरी, हम ही आसमान थे,
कुछ भी हो खता हमसे मगर अन्जाम एक थे…….4
आईने में दिखते थे जैसे, वैसे ही मेरी आँखों में भी तो थे,
आईने में दिखते थे जैसे, वैसे ही मेरी आँखों में भी तो थे,
तुम कितनी भी बदल जाओ मगर एहसास एक थे………5
क्या खूब अक्स था तेरा, अब्र तेरी अब्रुओं पे घिरते थे,
क्या खूब अक्स था तेरा, अब्र तेरी अब्रुओं पे घिरते थे,
कितना भी घुमड़कर बरसो तुम मगर वो आब एक थे……….6
क्या खूब तेरी आंखे थी,आंखे जैसे कि महताब थे,
क्या खूब तेरी आंखे थी,आंखे जैसे कि महताब थे,
हर शाम मैं बहकता था सारे अस्बाब एक थे…..7
होता नहीँ मुनासिब अब, जो हालात पहले थे,
होता नहीँ मुनासिब अब, जो हालात पहले थे,
होंठो से कभी, कभी हांथो से पिलाते थे मगर खुमार एक थे………8
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