Song 8 मुद्दत हुयी लुटेरे, चाँद नहीँ देखा मैने..

मुद्दत हुयी लुटेरे, चाँद नहीँ देखा मैने,
रुख से हटा दो परदा मिल जाये सुकून शायद…….१
रो – रो के सूखता है, अक्सर हलक ये मेरा,
दो घूँट पिला दो कोई मिल जाये सुकून शायद……..२
मुद्दत हुयी लुटेरे, देखा नहीँ है तुझको,
एक झलक दिखा दे अपनी मिल जाये सुकून शायद…..३
बुझ गये चराग सारे, कोई रास्ता नजर न आये,
पहुँचा दे मुझको मयख़ाने मिल जाये सुकून शायद……४
कबसे तलब लगी है, साकी नहीँ है मिलता,
एक रोज लबों से पिला दो मिल जाये सुकून शायद……५
किस-किस से पूछता फिरूँगा, मयख़ाना कहाँ-कहाँ हैं,
एक जाम तुम बना दो मिल जाये सुकून शायद……….६

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