Song इश्क़ ना सही रंजिश ही निभाने आ जा..

इश्क़ ना सही रंजिश ही निभाने आ जा,
आ जा एक बार,
फिर से मुझको आजमाने आ जा……..१
मैने माना
कि मोहब्बत में मैंने भी खतायें की हैँ,
इन्सान हूँ मैं,
इन्सान समझकर मेरा साथ तू निभाने आ जा…….२
मैं हर शर्त पे तेरे साथ को अमादा हूँ,
तू भी एक बार
सबको भुलाकर मेरी बाहोँ में समाने आ जा……..३
अब कोई छोर
कोई कश्ती नहीँ दिखती मुझको,
हो सके तो एक बार
मुझको मझधार में बचाने आ जा……..४
तेरे बगैर रह लिया एक जमाना मैने,
अब होता नहीँ गुजारा
आ जा एक बार
मुझे अपने सीने से लगाने आ जा……..५
कब तलक रूठे रहोगे मुझसे मेरे होकर भी,
आ तलबगार मुझपे एक बार
अपना हक जताने आ जा……..६
रोज साँसों को दुहाई देता हूँ
रोज धड़कन को दुहाई देता हूँ,
अब नहीँ सुनता मेरी बात कोई
आजा एक बार
मेरी जिन्दगी बचाने आ जा………७
हाँ, किये होँगे कयी सितम मैने
रोज खुद ही मैं तड़पता हूँ
आ जा एक बार सनम
मुझको जुल्मों की सजायें देने आ जा…….८

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