Song जाने क्या कह जाती हैं ये बारिश की बूंदें..
जाने क्या कह जाती हैं
ये बारिश की बूंदें,
तेरी याद दे जाती हैं
ये बारिश की बूंदे,
मन भीग तो रहा है
तन भीग तो रहा है
जाने कैसी प्यास ये बढ़ाती हैँ
बारिश की बूंदें………….१
हौले-हौले से
हौले-हौले से
मेरे कानों को छू लें,
चुपके-चुपके से
मेरे लबों पे फिसलें,
थोड़ा-थोड़ा सा
मेरा बदन भिगोकर
जाने कैसी प्यास ये बढ़ाती हैं
बारिश की बूंदें………२
अभी-अभी तो मैं जगा था
अभी-अभी तो मैं जगा था
तेरी यादों की राह मैं चला था,
चुपके से
मेरे चेहरे को छूकर
पालकों से लिपट जाती हैँ
जाने कैसी प्यास ये बढ़ाती हैं
बारिश की बूंदें………..३
रब का मैं शुक्र मनाऊँ
रब का मैं शुक्र मनाऊँ
तेरी यादों से मैं लिपट जाऊँ,
चाहे मैं कहीँ भी जाऊँ
रिम-झिम की आवाज
मेरे कानों में आती है,
जाने कैसी प्यास ये बढाती हैं
बारिश की बूंदें………..४
अभी कल ही तो
अभी कल ही तो
बरसे थे बदल,
ज़मीन को
फिर से किया था घायल,
न जाने फिर कहाँ से
बादलोँ सँग चली आती हैं,
जाने कैसी प्यास ये बढ़ाती हैं
बारिश की बूंदें…………५
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